Monday, 27 September 2021

मेहनत विषय पर कविता - कक्षा - छटवीं - अ एवं ब ( पुस्तकालय गतिविधि ) केंद्रीय विद्यालय सुबाथू

 प्रेरणा  - अनिल कुमार गुप्ता ( पुस्तकालय अध्यक्ष )


मेहनत 


मेहनत से होते सब काम 

करना नहीं तुम्हें आराम 


मेहनत से मिलता है सुख 

मेहनत से होता रोशन नाम 


मेहनत से हैं चारों धाम 

मेहनत बिन न होता काम 


मेहनत से सब होता हासिल 

मेहनत से होते सब काबिल 


मेहनत के बिन सब हैं अधूरे 

मेहनत बिन काम न होते पूरे 


मेहनत से मिलते सुख सारे 

मेहनत से ही हैं , चमके भाग्य हमारे 


मेहनत से होते सब काम 

करना नहीं तुम्हें आराम 


मेहनत से मिलता है सुख 

मेहनत से होता रोशन नाम 


पानी विषय पर कविता - कक्षा - छटवीं - अ एवं ब - ( पुस्तकालय गतिविधि ) केंद्रीय विद्यालय सुबाथू

प्रेरणा  - अनिल कुमार गुप्ता ( पुस्तकालय अध्यक्ष )

 पानी 


पानी हमारा जीवन है 

पानी से ही सबका जीवन है 


पानी बिन सब लागे सूना 

पानी बिन सब होता अधूरा 


पानी गर्मी से राहत देता 

पानी सबको जीवन देता 


जीवन का आधार है पानी 

देता सबको जिंदगानी 


व्यर्थ नहीं बहाना पानी 

जल है तो,  बेहतर कल है 


पौधों का जीवन है पानी 

जल पीकर , जीते सब प्राणी 


पानी हमारा जीवन है 

पानी से ही सबका जीवन है 


पानी बिन सब लागे सूना 

पानी बिन सब होता अधूरा 

DRAWING SKILL BY VANSHIKA OF CLASS 7 A - KV SUBATHU


 

DRAWING SKILL BY RITIKA OF CLASS 7 A - KV SUBATHU


 

HINDI PAKHWADA POSTER BY ARPITA OF CLASS 8A- KV SUBATHU


 

गणेश - कक्षा आठवीं ब द्वारा रचित कविता - कोरोना का खौफ

प्रेरणा स्रोत  - अनिल कुमार गुप्ता ( पुस्तकालय अध्यक्ष )  

कोरोना का खौफ 


जाने कैसा दौर ये आया 

मानव से मानव घबराया 

डर ने सबके दिल में घर बनाया 

जाने कैसा दौर ये आया 


शहर दुकानें बंद पड़ी हैं 

गलिया सभी सुनसान पड़ी हैं 

घर  - घर में है मातम छाया 

जाने कैसा दौर ये आया 


रिश्तों की डोर है टूटी 

अपनों की अपनों से दूरी 

अपनों ने दामन है छुड़ाया

जाने कैसा दौर ये आया 


कहाँ गए वो त्यौहार और वो मेले 

अपने घर में हुए सब अकेले 

कैसी ये अकाल की छाया 

जाने कैसा दौर ये आया 


चलो थोड़े दिनों की और है बात 

होगी फिर खुशियों की बरसात 

ये मुस्किल समय भी टल जाएगा 

फिर ये दौर नहीं आयेगा 






कार्तिक चंदेल द्वारा रचित कविता - नए युग का करो निर्माण - कक्षा - ग्यारहवीं - स ( केंद्रीय विद्यालय सुबाथू )

 प्रेरणा स्रोत  - अनिल कुमार गुप्ता - पुस्तकालय अध्यक्ष 


नए युग का करो निर्माण

 

क्यों है मानव परेशान

नए युग का करो निर्माण

क्यों कर मशीन करे सारे काम

जब बेरोजगार है इंसान

 

जब नए हथियार कर रहे देश की रक्षा

फिर क्यों घबराती देश की जनता  

इस विषय पर भी करो विचार

 नए युग का करो निर्माण

 

सब काम हो रहे हैं ऑनलाइन

फिर क्यों बढ़ रहे हैं नए क्राइम

क्या ये हैं जीवन का आधार

नए युग का करो निर्माण

 

क्या विकास दुनिया को फलता

फिर  क्यों बच्चा रास्ते पर अकेले चलने से डरता

क्या बच्चे नहीं हैं देश की शान

नए युग का करो निर्माण

 

 

 

 

Sunday, 26 September 2021

कविता लेखन गतिविधि - कक्षा - आठवीं - अ एवं ब द्वारा रचित कवितायें - केंद्रीय विद्यालय सुबाथू

समन्वयक - अनिल कुमार गुप्ता "पुस्तकालय अध्यक्ष "


कविता  - 1 


 छोटे बच्चे लगते प्यारे 


छोटे बच्चे लगते प्यारे 

जो होते अपने माँ  - बाप की आँखों के तारे 


होते हैं जो सबसे दुलारे 

बच्चे होते दिल के प्यारे 


सबके लिए जो होते दुलारे 

होते जो अपने माँ  - बाप के बुढ़ापे के सहारे 


दादा  - दादी के होते दुलारे 

तभी करते इनसे प्यार सारे ||


कविता   - 2 


बेटियाँ 


बेटियाँ होती हैं सबकी प्यारी 

बेटियों से है दुनिया निराली 


घर होता इनके बिन खाली 

बेटियाँ होती हैं सबकी दुलारी 


बेटियाँ होतीं सबसे न्यारी 

इसने ही दशहरा इनसे ही दीवाली 


इनसे रोशन होती घर की फुलवारी 

बेटियाँ होती हैं दिल की प्यारी ||